नेताओं की फिसलती जबान... सैनिको का अपमान !!

     50 डिग्री की तपती धूप, दूर-दूर तक ना कोई वनस्पति, ना कोई प्राणी, ऊपर से गरम रेत की आंधियों के थपेड़े....
वहीं दूसरी तरफ हाड माँस खून तक को जमा देने वाली शून्य से भी 50 डिग्री नीचे का तापमान, दूर दूर तक ना कोई वनस्पति, ना कोई प्राणी, हर तरफ बर्फ ही बर्फ....
     यह सब नजारे हैं हमारे हिन्दूस्तान की सरहद के और इसी सरहद की आन बान शान की रक्षा के लिए अपनी जान न्यौछावर करने का जज्बा लिए तैनात हैं हमारे शूरवीर जांबाज़ सैनिक। मजाल है इनके होते हुए कोई भी दुश्मन हमारी मातृभूमि की ओर आँख भी उठा कर देख सके। दुश्मन की कोई भी गोली हमारी ओर ना आ सके, उससे पहले हमारे जांबाज सैनिक अपना फौलादी सीना लिए सदेव खड़े हैं हर पल। नमन करता हूं ऐसे हर वीर जांबाज को....
     जिंदगी और मौत तो एक शाश्वत सत्य है जिस प्राणी ने भी इस धरती पर जन्म लिया है उसे एक ना एक दिन तो अवश्य मरना ही होगा लेकिन दूसरों की रक्षा के लिए अपनी जान की बाजी लगा देना, हर किसी के बस की बात नहीं। जीने के लिए पेट तो भरना ही है और पेट भरने के लिए कमाना भी जरूरी है लेकिन ऐसी कमाई के लिए अपनी जान की बाजी लगा देना कोई छोटी मोटी बात नहीं।
     बावजूद इस के आजकल हमारे ऐसे जांबाज़ वीरों के अपमान स्वरूप जो चाहे जब चाहे उल जलूल बयानबाजी करने में लगा है। ऐसी अपमानजनक बयानबाजी करने वालों में सबसे ज्यादा तादाद हमारे नेताओं की ही है। यहां यह याद दिलाना जरूरी है कि हमारे नेता चाहे विधायक हो या सांसद, या फिर किसी भी स्तर का नेता हो, वह जब भी कर्तव्यनिष्ठता की शपथ लेता है तो कमोबेश वैसी ही शपथ लेता है, जैसा कि एक फौजी सैनिक....
तो फिर दोनों के कर्तव्य निभाने के तरीके अलग-अलग कैसे हो जाते हैं ? जहां एक फौजी हमारे देश की जान माल की सुरक्षा के लिए सदैव सरहद पर डटा रहता है, तो कभी कभी जरुरत पड़ने पर आंतरिक सुरक्षा में भी अपना दायित्व निभाने से नहीं चूकता और हमारे नेताओं का भी दायित्व बनता है कि देश के हर समाज समुदाय की सुरक्षा के लिए जी जान लगा दे। लेकिन कुछ एक नेताओं को छोड़ लगभग सभी नेताओं ने सामाजिक सुरक्षा को छोड़, घपले घोटालो से अपना घर भरना और ऐसी बेतुकी बयानबाज़ी को अपना हक समझ लिया है। कभी कोई सैनिकों को अनपढ़ गंवार कहता है, कभी बलात्कारी कहता है, कभी सड़क छाप गुण्डा कहता है, कभी दुश्मन पर की गई जवाबी कारवाही पर सवाल उठाते हुए नाटकबाजी करार करता है, और भी ना जाने कैसे कैसे भद्दे बयान आये हैं नेताओं द्वारा हमारे वीर सैनिको के लिए।
     हमारे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी जो स्वयं हमेशा ही हमारे वीर सैनिकों की समय-समय पर हौसला अफजाई करते रहते हैं, ऐसी स्थिति में माननीय प्रधानमंत्री जी एवं माननीय राष्ट्रपति महोदय से निवेदन करना चाहूंगा कि ऐसे सभी लोगों पर कड़ी कारवाही करें और साथ ही ऐसे ठोस नियम बनायें कि देश के हर नागरिक का कर्तव्य हो कि हर परिस्थिति हमारे सैनिको का सम्मान एवं सहयोग करना ही होगा और इन नियमो का उलंघन करने वालो पर दण्डात्मक कारवाही की जायेगी। जहाँ तक सजा का सवाल है तो दोषी व्यक्ति को दोनों ही हालात में 3- 3 महीने गुजरने का दण्ड दिया जा सकता है।
जयहिन्द !!
जय जवान !!
वन्देमातरम !!