यूपी नगर निकाय चुनाव 2017 : समीक्षा
हिन्दूस्तान के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में बीते 22, 26 और 29 नवम्बर को नगर निकाय चुनाव 2017 संपन्न हो गए। मतगणना 1 दिसंबर 2017 को की गई। पहले 2014 में लोकसभा और फिर करीब 7-8 महीने पहले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की प्रचंड जीत के बाद यह नगर निकाय चुनाव बेहद ही खास था।
जहां केंद्र की नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी की सरकार के नोटबंदी जैसे देश के दीर्घकालीन विकास हेतु लिए गए फैसलो के बावजूद विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी की धमाकेदार जीत हुई और उसके बाद मुख्यमंत्री के तौर पर योगी आदित्यनाथ जी की ताजपोशी और फिर GST जैसे एक और विकासन्मुखी कड़े कदम के बाद यह चुनाव मुख्यमंत्री योगी जी एवं प्रधानमंत्री मोदी जी के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम न था। वैसे भी गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए 9 और 14 दिसंबर को होने वाले मतदान के रूप में भी यह निकाय चुनाव खास था।
16 नगर निगम जिसमें से चार नगर निगम अयोध्या, मथुरा-वृंदावन, फिरोजाबाद और सहारनपुर अभी हाल ही में अस्तित्व में आए हैं। इसके साथ ही 198 नगर पालिका और 438 नगर पंचायतों का चुनाव संपन्न हुआ। 16 नगर निगम में 14 नगर निगम पर भारतीय जनता पार्टी का कब्जा और दो नगर निगम पर बहुजन समाज पार्टी का मेयर चुना गया। मेरठ और अलीगढ़ नगर निगम सहित 10 निगमो पर 2012 में भारतीय जनता पार्टी का मेयर चुना गया था लेकिन किसी भी निगम में भाजपा को बहुमत हासिल नहीं हुआ था।
हालाँकि मेरठ और अलीगढ़ निगम बसपा की झोली में चले गए फिर भी भाजपा को 14 निगम के साथ नगर पालिका और नगर पंचायतों में भी प्रचण्ड जीत मिली।
इस चुनाव में खास बात रही कि मोदी सरकार के विकास को बात बात पर धिक्कारने वाली काँग्रेस और समाजवादी पार्टी का लगभग सुपड़ा साफ हो गया। इतना ही नहीं राहुल गाँधी के खानदानी संसदीय क्षेत्र में भी भाजपा की जीत के साथ काँग्रेस की करारी हार हुई और वह चौथे स्थान पर लुढ़क गयी।
इस चुनाव में ओवेसी की पार्टी और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की आप पार्टी ने थोड़ी सी अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई लेकिन आप पार्टी के अधिकतर उम्मीदवार अपनी जमानत तक नहीं बचा पाये।
अब इस जीत के बाद एक बार फिर से तमाम विपक्षी दल EVM को कोसने में जुट गए। जबकि उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव के बाद उपजे इस आधारहीन मुद्दे पर माननीय चुनाव आयोग ने सभी विपक्षी दलों को EVM हैक कर के दिखाने के लिए खुला निमंत्रण दिया था लेकिन कोई भी दल आगे आ कर उपस्थित ही नहीं हुआ। वैसे भी पंजाब विधानसभा चुनाव में काँग्रेस की बड़ी जीत और यूपी निकाय चुनाव में बसपा के 2 मेयर चुने जाने पर यही दल मोदी सरकार की नाक़ामियाँ गिनवाने लग जाते है, यही हास्यस्पद लगता है कि अपने गिरेबान में कोई दल झाँक कर नहीं देखता कि कितने दाग लगे हैं ?
खैर अब इस चुनावी नतीजो से जहाँ एक तरफ गुजरात के मतदाता देश की जनता के मन को समझ कर फिर से एक अच्छी सरकार की तरफ रह सकेंगे तो वहीं गुजरात की विजय रूपानी जी की वर्तमान भारतीय जनता पार्टी की सरकार और केंद में माननीय नरेंद्र मोदी जी के कुशल नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी की सरकार को सम्बल मिलेगा।
जयहिन्द !!
वन्देमातरम !!
दिनेश भंडुला
जहां केंद्र की नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी की सरकार के नोटबंदी जैसे देश के दीर्घकालीन विकास हेतु लिए गए फैसलो के बावजूद विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी की धमाकेदार जीत हुई और उसके बाद मुख्यमंत्री के तौर पर योगी आदित्यनाथ जी की ताजपोशी और फिर GST जैसे एक और विकासन्मुखी कड़े कदम के बाद यह चुनाव मुख्यमंत्री योगी जी एवं प्रधानमंत्री मोदी जी के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम न था। वैसे भी गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए 9 और 14 दिसंबर को होने वाले मतदान के रूप में भी यह निकाय चुनाव खास था।
16 नगर निगम जिसमें से चार नगर निगम अयोध्या, मथुरा-वृंदावन, फिरोजाबाद और सहारनपुर अभी हाल ही में अस्तित्व में आए हैं। इसके साथ ही 198 नगर पालिका और 438 नगर पंचायतों का चुनाव संपन्न हुआ। 16 नगर निगम में 14 नगर निगम पर भारतीय जनता पार्टी का कब्जा और दो नगर निगम पर बहुजन समाज पार्टी का मेयर चुना गया। मेरठ और अलीगढ़ नगर निगम सहित 10 निगमो पर 2012 में भारतीय जनता पार्टी का मेयर चुना गया था लेकिन किसी भी निगम में भाजपा को बहुमत हासिल नहीं हुआ था।
हालाँकि मेरठ और अलीगढ़ निगम बसपा की झोली में चले गए फिर भी भाजपा को 14 निगम के साथ नगर पालिका और नगर पंचायतों में भी प्रचण्ड जीत मिली।
इस चुनाव में खास बात रही कि मोदी सरकार के विकास को बात बात पर धिक्कारने वाली काँग्रेस और समाजवादी पार्टी का लगभग सुपड़ा साफ हो गया। इतना ही नहीं राहुल गाँधी के खानदानी संसदीय क्षेत्र में भी भाजपा की जीत के साथ काँग्रेस की करारी हार हुई और वह चौथे स्थान पर लुढ़क गयी।
इस चुनाव में ओवेसी की पार्टी और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की आप पार्टी ने थोड़ी सी अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई लेकिन आप पार्टी के अधिकतर उम्मीदवार अपनी जमानत तक नहीं बचा पाये।
अब इस जीत के बाद एक बार फिर से तमाम विपक्षी दल EVM को कोसने में जुट गए। जबकि उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव के बाद उपजे इस आधारहीन मुद्दे पर माननीय चुनाव आयोग ने सभी विपक्षी दलों को EVM हैक कर के दिखाने के लिए खुला निमंत्रण दिया था लेकिन कोई भी दल आगे आ कर उपस्थित ही नहीं हुआ। वैसे भी पंजाब विधानसभा चुनाव में काँग्रेस की बड़ी जीत और यूपी निकाय चुनाव में बसपा के 2 मेयर चुने जाने पर यही दल मोदी सरकार की नाक़ामियाँ गिनवाने लग जाते है, यही हास्यस्पद लगता है कि अपने गिरेबान में कोई दल झाँक कर नहीं देखता कि कितने दाग लगे हैं ?
खैर अब इस चुनावी नतीजो से जहाँ एक तरफ गुजरात के मतदाता देश की जनता के मन को समझ कर फिर से एक अच्छी सरकार की तरफ रह सकेंगे तो वहीं गुजरात की विजय रूपानी जी की वर्तमान भारतीय जनता पार्टी की सरकार और केंद में माननीय नरेंद्र मोदी जी के कुशल नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी की सरकार को सम्बल मिलेगा।
जयहिन्द !!
वन्देमातरम !!
दिनेश भंडुला


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